महात्मा गांधी, जयप्रकाश नारायण, राममनोहर लोहिया, बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर, जननायक कर्पूरी ठाकुर – ये वो नाम हैं जिनके बिना किसी नेता या दल का भाषण पूरा नहीं होता। राजनीति का हर मंच इन या ऐसे नामों के बिना अधूरा है। पर जब आप इन्हें भाषणों से निकालकर भावों में धारण करने वाले, इनके विचारों को व्यवहार में उतारने वाले को ढूंढ़ने चलेंगे तो आपकी नज़रें श्री नीतीश कुमार पर आकर टिक जाएंगी। आप पाएंगे कि एकमात्र वही हैं, जो इन तमाम महापुरुषों के विचारों और संस्कारों के, उनके आदर्शों और सपनों के धारक और वाहक हैं। उनका पूरा राजनीतिक जीवन ही इस बात की बानगी है और अगर हम मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल की चर्चा करें तो 2005 में बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार शपथ लेने से लेकर आज तक उनके अनगिनत निर्णय और कार्य हैं, जो संभव ही इस वजह से हुए कि उन्होंने इन पुरोधाओं में अपनी आस्था की डोर बड़ी मजबूती से थाम रखी थी। 2005 से पहले के ‘अंधेरे’ और ‘असुरक्षित’ बिहार में सुशासन की स्थापना हो, न्याय के साथ विकास की अवधारणा हो, बालिकाओं के लिए साइकिल और पोशाक योजना हो, महिलाओं के लिए पंचायतों में 50 प्रतिशत और नौकरियों में 35 प्रतिशत आरक्षण हो, शराबबंदी, दहेजबंदी और बालविवाहबंदी हो, लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम कानून हो, हर धर्म, जाति और वर्ग के प्रति समभाव और सबका समान सशक्तिकरण हो और कुल मिलाकर बिहार के अतीत के गौरवबोध की वापसी हो – नीतीश कुमार ने और प्रकारान्तर से हमारे दल जदयू ने मील के कई पत्थर स्थापित किए हैं और इन सबका श्रेय उन प्रतीक-पुरुषों को दिया है, जिनके विचारों के पथ पर वे चलते रहे हैं। बढ़ते बिहार को गढ़ने वाले मील के उन पत्थरों में से बेहद महत्वपूर्ण 21 आपके सामने हैं:


मील के 21 पत्थर
  • योजना आकार में 18 गुना वृद्धि
  • आधारभूत संरचना का विकास: सड़क, पुल, बिजली
  • कृषि रोडमैप: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ताकत
  • शिक्षा के क्षेत्र में 20 प्रतिशत से ज्यादा का बजट
  • बीमार स्वास्थ्य सेवा की चिकित्सा
  • महिला सशक्तिकरण: कन्या-सुरक्षा और साइकिल से आरक्षण तक
  • कानून का राज: सुशासन की अद्भुत बानगी
  • सामाजिक सरोकार: शराबबंदी, दहेजबंदी, बालविवाह-बंदी
  • लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम
  • सात निश्चय योजना
  • समाज का समावेशी विकास: कमजोरों को आरक्षण
  • अल्पसंख्यकों के लिए ‘वोटबैंक’ से ऊपर की सोच
  • प्रकाश-पर्व का ऐतिहासिक आयोजन
  • मानव-श्रृंखला: प्रतिबद्धता का अभूतपूर्व प्रकटीकरण
  • ‘नीड’ और ‘ग्रीड’ का फर्क: भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस
  • पार्टी की सदस्यता के लिए पेड़ लगाने की शर्त
  • विशेष राज्य की मांग को लेकर हस्ताक्षर अभियान
  • राष्ट्रहित के मुद्दों पर स्पष्ट और बेबाक राय
  • स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना: फ्यूडल सोसायटी से नॉलेज सोसायटी की यात्रा
  • सामाजिक सद्भाव: टिकाऊ विकास की पूर्वपीठिका
  • बिहार दिवस: बिहार के गौरवबोध की वापसी

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