बिहार समेत पूरे देश में एनडीए की सुनामी

भारत की जनता ने राष्ट्रवाद और नए भारत के सपनों को पूरा करने वाले ‘फकीर’ की झोली को प्रचंड बहुमत से भरकर लगातार दूसरी बार केन्द्र की सत्ता सौंप दी। नरेन्द्र मोदी ने लगभग 7.5 प्रतिशत अधिक मतों के साथ धमाकेदार वापसी की। भाजपा ने अकेले अपने दम पर 303 और सहयोगियों को मिलाकर 352 सीटें जीत लीं। वहीं कांग्रेस 52 और सहयोगियों को जोड़ दें तो 87 सीटों पर सिमट गईं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी अमेठी तक नहीं बचा पाए। हालांकि वायनाड से उनको संजीवनी जरूर मिल गई। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही नरेन्द्र मोदी जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी की लीग में शामिल हो गए। 48 साल बाद कोई पार्टी लगातार दूसरी बार बहुमत में आई। नेहरू और इंदिरा के बाद ऐसी जीत पाने वाले मोदी पहले गैर कांग्रेसी हैं। आखिरी बार 1971 में इंदिरा ने ऐसी जीत पाई थी।


 बिहार की बात करें तो यहां एनडीए की सुनामी में सारे दल बह गए। भाजपा, जदयू और लोजपा ने मिलकर यहां 40 में 39 सीटें अपने नाम कर लीं। बड़ी बात यह कि जीती गई 39 सीटों में 18 पर जीत का अंतर 2 लाख से अधिक, 4 पर तीन लाख से अधिक तो 3 पर चार लाख से अधिक का रहा। उधर राजद, रालोसपा, हम और वीआईपी शून्य पर आउट हुई। कांग्रेस किसी तरह किशनगंज की एक सीट हासिल कर पाई। दो जगहों - उजियारपुर और काराकाट - से हाथ आजमा रहे रालोसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा दोनों सीटों पर मुंह के बल गिरे। हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतनराम मांझी भी अपनी बची-खुची साख बचाने में नाकाम रहे। मधेपुरा से लोजद के संस्थापक व राजद से लड़े शरद यादव और जाप के संस्थापक पप्पू यादव जदयू के दिनेशचंद्र यादव के हाथों बुरी तरह पराजित हुए। हाल के दिनों में चर्चा में आए और महागठबंधन में अप्रत्याशित रूप से तीन सीटें पा गए वीआईपी के मुकेश सहनी भी सभी सीटों पर फिसड्डी साबित हुए। लालू प्रसाद यादव की बड़ी बेटी मीसा भारती को जहां एक बार फिर पाटलिपुत्र सीट पर निराशा हाथ लगी, वहीं राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रही बेगूसराय सीट सीपीआई के कन्हैया कुमार भाजपा उम्मीदवार गिरिराज सिंह के हाथों चार लाख से अधिक वोटों से धाराशायी हुए। पटना साहिब से शत्रुघ्न सिन्हा को भी खामोश होना पड़ा। रघुवंश प्रसाद सिंह, अब्दुल बारी सिद्दीकी, जगदानंद सिंह, जयप्रकाश नारायण यादव, चंद्रिका राय जैसे राजद के तमाम बड़े नेता और कांग्रेस से मीरा कुमार, तारिक अनवर, रंजीत रंजन और उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह भी हारने वालों में शामिल हैं। वहीं, एनडीए की बात करें तो इस बार मैदान में उतरे बिहार के सभी छह केन्द्रीय मंत्रियों – रविशंकर प्रसाद, राधामोहन सिंह, गिरिराज सिंह, रामकृपाल यादव, अश्विनी चौबे और आरके सिंह – और राज्य सरकार के तीन मंत्रियों - राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, दिनेशचन्द्र यादव और पशुपति कुमार पारस – ने जीत दर्ज की।


एनडीए की बड़ी सफलता पर जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने कहा कि लोगों ने नरेन्द्र मोदी सरकार के काम और बिहार में हमारी 13 साल की मेहनत पर भरोसा करके जनादेश दिया। समाज में कटुता फैलाने वालों को नकारा। लोगों ने अपनी चाहत बताई। उनको प्रेम, सौहार्द और विकास चाहिए। यह जीत सीधे तौर पर जनता इफेक्ट है। हमारी जिम्मेदारी और बढ़ी है। हम इसे पूरा करने की पूरी कोशिश करेंगे। इस मौके पर उन्होंने एक बार फिर क्राइम, करप्शन और कम्यूनलिज्म से समझौता नहीं करने का संकल्प दोहराया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व बिहार की जनता को बधाई दी।


अब एक नज़र बिहार से एनडीए के विजयी उम्मीदवारों पर। सर्वप्रथम जदयू के 16 नवनिर्वाचित सांसदों के नाम, जो इस प्रकार हैं: वैद्यनाथ प्रसाद महतो (वाल्मीकिनगर), संतोष कुमार कुशवाहा (पूर्णिया), महाबली सिंह (काराकाट), सुनील कुमार पिन्टू (सीतामढ़ी), कविता सिंह (सीवान), राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह (मुंगेर), दिनेशचन्द्र यादव (मधेपुरा), गिरिधारी यादव (बांका), रामप्रीत मंडल (झंझारपुर), दिलेश्वर कामत (सुपौल), दुलालचंद गोस्वामी (कटिहार), अजय कुमार मंडल (भागलपुर), कौशलेन्द्र कुमार (नालंदा), चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी (जहानाबाद), डॉ. आलोक कुमार सुमन (गोपालगंज) और विजय कुमार मांझी (गया)। भाजपा के 17 विजयी उम्मीदवार इस प्रकार हैं: रविशंकर प्रसाद (पटना साहिब), रामकृपाल यादव (पाटलिपुत्र), अजय निषाद (मुजफ्फरपुर), आरके सिंह (आरा), अश्विनी चौबे (बक्सर), राधामोहन सिंह (पूर्वी चंपारण), डॉ. संजय जायसवाल (पश्चिमी चंपारण), रमा देवी (शिवहर), राजीव प्रताप रूडी (सारण), अशोक यादव (मधुबनी), गोपालाजी ठाकुर (दरभंगा), नित्यानंद राय (उजियारपुर), गिरिराज सिंह (बेगूसराय), छेदी पासवान (सासाराम), सुशील सिंह (औरंगाबाद), जनार्दन सिंह सिग्रीवाल (महाराजगंज) और प्रदीप सिंह (अररिया)। लोजपा के छह सफल उम्मीदवारों के नाम इस प्रकार हैं: पशुपति कुमार पारस (हाजीपुर), चिराग पासवान (जमुई), रामचन्द्र पासवान (समस्तीपुर), वीणा देवी (वैशाली), चंदन कुमार (नवादा) और महबूब अली कैसर (खगड़िया)। महागठबंधन के खाते में गई एकमात्र सीट किशनगंज से कांग्रेस के डॉ. मोहम्मद जावेद सफल हुए। सभी नवनिर्वाचित सांसदों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं।

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