नीति आयोग में छाया विशेष राज्य का मुद्दा

राजधानी दिल्लीक में रविवार को संपन्नी नीति आयोग के गवर्निंग काउंसिल की बैठक में बिहार और मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार छाए रहे। मुख्यमंत्री ने इस बैठक में बिहार के लिए विशेष राज्य के दर्जे की मांग एक बार फिर पुरजोर तरीके से रखी। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग के शासी परिषद की चौथी बैठक में अपनी मांग दोहराते हुए उन्होंने विकास के मानकों के साथ-साथ मानव विकास से संबंधित सूचकांक में बिहार के पिछड़ेपन का मुद्दा भी उठाया। इसके साथ ही उन्होंने सात निश्चय के तहत चल रहे कार्यक्रमों तथा सामाजिक अभियान के अंतर्गत शराबबंदी, दहेज उन्मूलन व बाल विवाह के खिलाफ चल रहे अभियान के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने की मांग भी रखी। 


इस मौके पर मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने कहा कि यदि अंतर क्षेत्रीय एवं अंतरराज्यीय विकास के स्तर में भिन्नता से संबंधित आंकड़ों की समीक्षा की जाए तो पाया जाएगा कि कई राज्य विकास के मापदंड, जैसे प्रति व्यक्ति आय, शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा, सांस्थिक वित्त एवं मानव विकास सूचकांकों पर राष्ट्रीय औसत से काफी नीचे हैं। ऐसी स्थिति में तर्कसंगत आर्थिक रणनीति वही होगी जो ऐसे निवेश और अंतरण की पद्धति को प्रोत्साहित करे जिससे पिछड़े राज्यों को एक निर्धारित समय सीमा में विकास के राष्ट्रीय औसत तक पहुंचने में मदद मिले। 


बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने के पक्ष में प्रभावशाली तरीके से अपनी बात रखते हुए श्री नीतीश कुमार ने कहा कि इससे केंद्र प्रायोजित योजनाओं के केंद्रांश में वृद्धि होगी और राज्य को अपने संसाधनों का उपयोग, विकास एवं कल्याणकारी योजनाओं में करने का अवसर मिलेगा। वहीं केंद्रीय जीएसटी में अनुमान्य प्रतिपूर्ति मिलने से निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही उन्होंने बीआरजीएफ के लंबित 1651.29 करोड़ के शीघ्र भुगतान की मांग भी गवर्निंग काउंसिल के सामने रखी। 


मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने बिहार में चल रहे सात निश्चय कार्यक्रम के साथ-साथ चल रहे पूर्ण शराबबंदी, दहेजबंदी, बाल विवाहबंदी जैसे सामाजिक अभियानों की चर्चा भी की और राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे इन कार्यक्रमों के लिए नीति आयोग के समर्थन व अतिरिक्त संसाधन की मांग की। आगे सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यों को सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली सहायता का उल्लेख राष्ट्रीय दृष्टि पत्र 2030 में स्पष्ट रूप से किया जाना चाहिए।

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